चुनावी विवाद: सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल चुनाव याचिकाओं पर सुनवाई करेगा
चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जहां जीत का अंतर हटाए गए वोटों की संख्या से कम था। यह मामला चुनावी प्रक्रियाओं में न्यायिक निरीक्षण और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका को उजागर करता है।
पृष्ठभूमि
यह मामला चुनावी अखंडता की रक्षा करने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है। यह भारत निर्वाचन आयोग की शक्तियों और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनावी ढांचे पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
महत्वपूर्ण आंकड़ा
• 31 सीटें — सीटों की संख्या जहां जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम था (तृणमूल का दावा)
मुख्य तथ्य
- 1अनुच्छेद 324: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति निहित करता है।
- 2चुनाव याचिकाएँ: उच्च न्यायालयों में दायर की जाती हैं (लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 80 के तहत)।
- 3लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951: चुनावों के संचालन, चुनावी विवादों और चुनाव याचिकाओं को नियंत्रित करता है।
- 4मतों की पुनर्गणना: चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 63 द्वारा शासित होती है।
- 5सर्वोच्च न्यायालय: चुनाव याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के निर्णयों पर अपीलीय क्षेत्राधिकार का प्रयोग करता है।
- 6न्यायिक समीक्षा: सर्वोच्च न्यायालय के पास निष्पक्षता और कानून के पालन को सुनिश्चित करने के लिए चुनाव संबंधी मामलों की समीक्षा करने की शक्ति है।
परीक्षा कोण
The judiciary's intervention in electoral disputes, as seen in the West Bengal case, highlights the constitutional mechanism for upholding the integrity of democratic elections and the need for robust electoral reforms.
PYQ संदर्भ
PRELIMS_FACT: ECI powers (Art. 324); STATEMENT_TRAP: Election petition jurisdiction.