ईरान का होर्मुज प्रोटोकॉल, ब्रिक्स विस्तार के बीच
चर्चा में क्यों
ईरान 'लागत' का हवाला देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक 'प्रोटोकॉल' विकसित कर रहा है, जबकि एक ब्रिक्स सदस्य (यूएई) ईरान की निंदा की मांग कर रहा है। यह भू-राजनीतिक तनावों और समुद्री चोक पॉइंट्स के रणनीतिक महत्व को उजागर करता है।
पृष्ठभूमि
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री चोक पॉइंट है, जो भारत के तेल आयात और फारस की खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक हितों को सीधे प्रभावित करता है।
महत्वपूर्ण आंकड़ा
• 1/5वां — होर्मुज से वैश्विक तेल आपूर्ति • 1 जनवरी, 2024 — ब्रिक्स विस्तार की तिथि
मुख्य तथ्य
- 1होर्मुज जलडमरूमध्य: फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
- 2होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण; वैश्विक तेल का लगभग 1/5वां हिस्सा इससे होकर गुजरता है।
- 3ब्रिक्स: मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका (5 सदस्य)।
- 4ब्रिक्स विस्तार (1 जनवरी, 2024): मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई शामिल हुए (कुल 10 सदस्य)।
- 5ईरान: 1 जनवरी, 2024 को ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना।
- 6यूएई: 1 जनवरी, 2024 को ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना।
परीक्षा कोण
The geopolitical significance of maritime choke points like the Strait of Hormuz underscores their vulnerability to regional tensions and their critical role in global energy security, impacting India's strategic calculus.
PYQ संदर्भ
PRELIMS_FACT: BRICS members, Strait of Hormuz location and significance.
मानचित्र बिंदु