भारत के पश्चिमी तट से पहली 'प्लास्टिस्टोन' संरचना की रिपोर्ट
चर्चा में क्यों
वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के दिवेगर समुद्र तट से 'प्लास्टिस्टोन' (प्लास्टिक-चट्टान निर्माण) का पहला प्रमाण रिपोर्ट किया है। पिछली खोजों के विपरीत, यह निर्माण प्राकृतिक माना जाता है, न कि मानव-प्रेरित।
पृष्ठभूमि
'प्लास्टिस्टोन' की खोज समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों पर प्लास्टिक प्रदूषण के व्यापक और दीर्घकालिक प्रभाव को रेखांकित करती है, जिसके लिए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के सख्त कार्यान्वयन और चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
महत्वपूर्ण आंकड़ा
• खोज — मई 2024
मुख्य तथ्य
- 1प्लास्टिस्टोन: एक नए प्रकार का प्लास्टिक-चट्टान निर्माण | प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बनता है जहाँ प्लास्टिक चट्टान से जुड़ जाता है।
- 2भारत में पहला रिपोर्ट किया गया प्रमाण: दिवेगर समुद्र तट, रायगढ़ जिला, महाराष्ट्र (पश्चिमी तट) | मई 2024 में खोजा गया।
- 3अन्य प्लास्टिक-चट्टान निर्माण: प्लास्टिग्लोमेरेट और पायरोप्लास्टिक | आमतौर पर प्लास्टिक के मानव-प्रेरित जलने से बनते हैं।
- 4भारत में पिछली प्लास्टिक-चट्टान खोजें: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तमिलनाडु (मुख्यतः प्लास्टिग्लोमेरेट/पायरोप्लास्टिक)।
- 5पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) 1986: भारत में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक व्यापक कानून।
- 6प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 (2021, 2022 में संशोधित): प्लास्टिक कचरे के पृथक्करण, संग्रह, प्रसंस्करण को अनिवार्य करता है; एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाता है।
परीक्षा कोण
The emergence of 'plastistone' highlights the pervasive and long-term impact of plastic pollution on marine ecosystems, necessitating stricter implementation of Plastic Waste Management Rules and promoting circular economy principles.
PYQ संदर्भ
PRELIMS_FACT|MATCHING: Marine pollution; Environmental Protection Act 1986; Plastic Waste Management Rules 2016